🍂 Change of Season Ayurveda Tips: ठंड से पहले अपनाएं आदतें लेखक: Ayurved by Yogesh Ji | Updated: October 2025 ऋतु परिवर्तन केवल मौसम का बदलाव नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर, मन और पाचन तंत्र पर गहरा प्रभाव डालता है। अक्टूबर-नवंबर में वात और कफ दोष बढ़ते हैं, जिससे जुकाम, खांसी, थकान, पाचन संबंधी समस्याएं, जोड़ों का दर्द और त्वचा का सूखापन आम होता है। यदि हम समय रहते आयुर्वेदिक उपाय अपनाएँ तो इन सभी परेशानियों से बचा जा सकता है और सर्दियों में ऊर्जावान और स्वस्थ रह सकते हैं। 🍁 1. बदलते मौसम का शरीर पर प्रभाव ऋतु परिवर्तन के समय शरीर में दोषों का असंतुलन बढ़ जाता है: वात दोष: ठंडी हवा से शरीर में सूखापन, जोड़ों में दर्द और मांसपेशियों में अकड़न बढ़ती है। कफ दोष: नमी के कारण बलगम, खांसी, भारीपन और नींद की समस्या बढ़ती है। अग्नि मंद: पाचन शक्ति कमजोर होने से गैस, कब्ज, भूख में कमी और शरीर में सुस्ती आती है। 💡 Expert Tip: मौसम बदलते समय शरीर को detox और balance में लाने का सबसे अच्छा समय होता है। हल्का योग, गर्म पानी और तिल/सरसों के तेल की मालिश अत्यंत लाभकारी ...